लेखनी कहानी -31-Oct-2023 माँ की बद्दुआ
शीर्षक = माँ की बद्दुआ
ये कहानी है उन बच्चों के लिए जो बड़े होकर समझते है कि वो माँ बाप से बड़े हो गए उन्हें अपनी मर्जी से चला सकते है उनकी अब उनकी जिंदगी में कोई एहमियत नही इसलिए कभी कभार वो उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ आते है जहाँ वो हर दम उन्हें याद कर इस दुनिया से चली जाती है और वो बच्चें कभी लोट कर नही आते
वैसे तो माँ के ज़ब भी हाथ उठते है तो वो दुआ के लिए ही होते है लेकिन वो बड़ी बदनसीब औलाद होती है जो माँ की बद्दुआ में शामिल होते है माँ कभी भी हाथ उठा कर अपनी औलाद के लिए बद्दुआ नही मांगती उसका दर्जा इतना बुलंद है कि उसके दिल का सीधा राब्ता उसके ईश्वर से होता है और ज़ब माँ का दिल रोता है तब दुआ हो या बद्दुआ सीधा अर्श को चीर कर उसके पास पहुंच जाती है जो इस दुनिया को चला रहा है
बात है हमारे बचपन की ज़ब हम मदरसे में जाया करते थे दीनी तालीम हासिल करने के लिए उस समय उर्दू की किताब में एक कहानी थी जो हमारे उस्ताद सुना रहे थे वो कहानी थी एक चिड़िया, एक दरख़्त और एक बड़े समुन्द्र की
एक बार समुन्द्र को मस्ती सूजी उसने अपने पानी को बड़ी बड़ी लेहरो में बदल दिया तेज हवा चलने लगी उसे अपने विशाल होने पर घमंड सा होने लगा था तब ही अचानक दरख़्त पर बने एक नन्ही चिड़िया के घोसले से उसका बच्चा उस समुन्दर में जा गिरा और उसकी लेहरो में डूबने लगा
ज़ब चिड़िया ने देखा तो बहुत घबरा गयी आखिर माँ थी अपने बच्चें को अपनी आँखों के सामने डूबता तो नही देख सकती थी उसने हर सम्भव कोशिश की उसे बचाने की लेकिन वो जितना उसे बचाती लहरें उसे और दूर ले जाती मानो समुन्द्र उसके साथ खेल रहा हो उसका बच्चा दर्द से ची ची कर रहा था
चिड़िया ने समुन्द्र से गुहार लगायी की वो अपनी लहरें को रोक दे ताकि वो अपने बच्चें को बचा सके लेकिन समुन्द्र उस समय मस्ती में था या यूं कहे अपने विशाल होने के घमंड में चूर था उसने मना कर दिया और पहले से भी ज्यादा लहरें तेज करदी जिससे उसका बच्चा और दूर जाता गया
पास खड़ा दरख़्त ये सब देख रहा था पर कुछ बोल न सका आखिर कार चिड़िया को भी गुस्सा आ गया उसने अपनी चोच में भर कर समुन्द्र का पानी कतरा कतरा करके उसे खाली करने का इरादा कर लिया एक नन्ही चिड़िया जिसने अपनी माँ होने का फ़र्ज़ निभाया और इतने बड़े विशाल समुन्द्र के आगे डट गयी अपनी नन्ही चोच से उस समुन्द्र को खाली ही करने का इरादा कर लिया।
पास खड़ा दरख़्त भी असमंजस में था कि आखिर ये चिड़िया कर क्या रही है इस जैसी लाखो चिड़िया भी मिल जाए तब भी समुन्द्र का मुकाबला नही कर सकती और ये अकेली ही इसे खाली करने पर तुली है
लेकिन तब ही समुन्द्र शांत हो गया और चिड़िया का बच्चा किनारे पर आ गया बच्चें को सही सलामत देख चिड़िया ने उसे अपने आगोश में ले लिया और उसे उड़ा कर वहाँ से दूर ले गयी।
अभी जो समुन्द्र अपने विशाल होने पर घमंड कर रहा था एक नन्ही चिड़िया से मुकाबले पर उतर आया था लेकिन ये क्या थोड़ी ही देर में वो शांत भी हो गया पास खड़ा दरख़्त कुछ समझ नही पाया इसलिए उसने पूछ ही लिया " क्या हुआ समुन्द्र भाई क्या तुम नन्ही सी चिड़िया से डर गए जो अपनी लेहरो को रोक लिया "
तब समुन्द्र ने हस कर जवाब दिया मैं चिड़िया से नही डरा इस जैसी लाखो चिड़िया भी अगर चोच में भर कर मुझे खाली करने का ठान ले तब भी मुझे नही खाली कर पाएंगी
फिर, फिर किस बात ने तुम्हे रुकने पर मजबूर कर दिया जो तुमने अपनी लेहरो को रोक दिया दरख़्त ने पूछा
एक माँ की बद्दुआ ने, मैं जानता था वो नन्ही चिड़िया मेरा कुछ नही बिगाड़ सकती जितना पानी वो अपनी चोच में भर रही थी मुझे खाली करने के लिए उससे मेरा कुछ भी नही बिगड़ता हाँ अगर उसके दिल से निकली बद्दुआ अगर मुझे बनाने वाले तक पहुंच जाती तो मेरा अस्तित्व हमेशा हमेशा के लिए समाप्त हो जाता जितना घमंड मुझे विशाल होने पर था सब खाक में मिल जाता मेरा सामना एक चिड़िया से नही एक माँ से हो रहा था जो अपने बच्चें को बचाने के लिए मुझे खाली कर देना चाह रही थी उस समय अगर वो मेरे लिए कोई बद्दुआ कर देती तो शायद आज मैं तुमसे बात भी नही कर पा रहा होता दरख़्त भाई समुन्द्र ने जवाब दिया और फिर अपनी लेहरो में फिर से वही उफान ले आया जो थोड़ी देर पहले था
दरख़्त भी उसकी इस बात से सहमत था तब ही उसकी नजर चिड़िया पर पड़ी जो अपने बच्चें के साथ खेल रही थी।
उस दिन उस्ताद द्वारा सुनाई ये कहानी हमें आज भी याद है और उसमे छिपा सन्देश भी।
समाप्त....
प्रतियोगिता हेतु
मोहम्मद उरूज खान
Varsha_Upadhyay
31-Oct-2023 07:47 PM
Nice 👌
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